बेनामी संपत्ति पर कसा शिकंजा, शक के दायरे में आए लगभग 50,000 लोगों को इनकम टैक्स विभाग का नोटिस!

बेनामी संपत्ति पर कसा शिकंजा, शक के दायरे में आए लगभग 50,000 लोगों को इनकम टैक्स विभाग का नोटिस!
इकनॉमिक टाइम्सApr 16, 2018

सांकेतिक तस्वीर
सचिन दवे, नई दिल्ली
इनकम टैक्स विभाग ने बेनामी संपत्ति रखने वाले लोगों पर शिंकजा कसना शुरू कर दिया है। आयकर विभाग बेनामी संपत्ति रखने वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई के लिए पुख्ता जमीन तैयार कर रहा है। इसी सिलसिले में इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने कई म्यूचुअल फंड होल्डर्स के नॉमिनीज, हाई नेटवर्थ इंडिविजुअल्स की पत्नियों (जो इनकम टैक्स फाइल नहीं करती हैं) और पिछले कुछ सालों में रियल एस्टेट प्रॉपर्टी बेचने वाले एनआरआईज को नोटिस भेजा गया है। नोटबंदी के दौरान बैंकों में 1 लाख रुपये से ज्यादा जमा करने वालों को भी नोटिस भेजा गया है। इस मामले से जुड़े 4 लोगों ने इकनॉमिक टाइम्स को यह जानकारी दी है। भेजे गए कुल नोटिसों की संख्या अभी पता नहीं चल पाई है, लेकिन एक इनकम टैक्स ऑफिसर के अनुसार यह संख्या 50,000 के आसपास हो सकती है। विभाग इन लोगों के पुराने ट्रांजैक्शंस, सोर्स ऑफ इनकम आदि की जांच कर रहा है।
एक अधिकारी के अनुसार, ‘शक के दायरे में आए सभी 50,000 लोगों के प्रॉसिक्यूशन नोटिस भेजा गया, जिसका मतलब यह है कि इन लोगों के दोषी साबित होने पर इन्हें कड़ा जुर्माना भरना पड़ सकता है। पहले इस तरह के मामलों में आरोपी को केवल फाइन भरने के बाद छोड़ दिया जाता था।’ टैक्स अधिकारी ने आगे बताया, ‘शक के दायरे में आए सभी लोगों के डेटा की जांच करने के बाद ही ये नोटिस भेजे गए हैं। हम बेनामी ट्रांजैक्शंस का पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं, इसलिए जिस मामले में भी हमें शक होता है, नोटिस भेजे जाते हैं।’
इनकम टैक्स विभाग ने पिछले कुछ सालों में प्रॉपर्टी बेचने वाले लोगों को भी नोटिस भेजा है। इन लोगों को तगड़ी पेनल्टी चुकानी पड़ सकती है। टैक्स अडवाइजरी फर्म के.पी.बी. ऐंड असोसिएट्स के पार्टनर पारस कहते हैं, ‘जिन लोगों के असेसमेंट के दौरान इनकम टैक्स डिपार्टमेंट को शक हुआ, उन्हें नोटिस भेजा गया है। पहले इस तरह के मामलों में टैक्सपेयर फाइन भर के छूट जाते थे, लेकिन अब उन्हें जेल भी जाना पड़ सकता है। इसी वजह से नोटिस पाने वाले लोगों में घबराहट का माहौल है।’
इंडस्ट्री की जानकारी रखने वाले लोगों का कहना है कि पहले प्रॉसिक्यूशन का प्रविजन वैसे मामलों में ही होता था जिसमें यह साबित होता था कि आरोपी नें जानबूझकर टैक्स नहीं चुकाया है। अब ऐसे मामलों में इनकम टैक्स ऑफिसर अगर नोटिस के जवाब से संतुष्ट नहीं होता है तो मामला मजिस्ट्रेट की कोर्ट में जा सकता है। सूत्रों के अनुसार इनकम टैक्स विभाग लोगों के फोन रिकॉर्ड्स, क्रेडिट कार्ड की जानकारी, टैक्स रिटर्न, पैन कार्ड की डीटेल्स और सोशल मीडिया पर उपलब्ध डेटा की भी जांच कर रहा है। अलग-अलग डेटा की जांच के दौरान अगर इनकम टैक्स विभाग को इनमें कोई खास पैटर्न दिखता है तो लोगों को नोटिस जारी किया जाता है।
इनकम टैक्स विभाग के नोटिस की सबसे खास बात यह है कि वैसे लोगों को भी नोटिस भेजे गए हैं जिन्होंने नोटबंदी के दौरान अपेक्षाकृत कम राशि बैंकों में जमा की थी। कुछ मामलों में तो 1 लाख रुपये तक डिपॉजिट करने वाले लोगों को भी नोटिस भेज गए हैं। हालांकि इनकम टैक्स विभाग के सूत्रों का कहना है कि एक खास पैटर्न देखने बाद ही ऐसे लोगों को नोटिस भेजे गए हैं। कई मामलों में कई अमीर लोगों के ड्राइवर्स, पत्नियों और रिश्तेदारों को भी नोटिस भेजे गए हैं। इन लोगों के नाम पर बेनामी संपत्ति खरीदने और इसपर टैक्स नहीं चुकाने का शक विभाग को है।