टर्नओवर छिपाकर भी अब नहीं बचा पाएंगे जीएसटी बिजली बिलों से आमदनी का अनुमान

जीएसटी बिजली बिलों से आमदनी का अनुमान

लखनऊ [अमित मिश्र]। कम टर्नओवर दिखाकर जीएसटी से बचने वाले व्यापारियों पर अब वाणिज्य कर विभाग ने शिकंजा कसने की तैयारी ली है। ऐसे व्यापारियों की असल कमाई पता करने के लिए विभाग अब नया पैंतरा आजमाने जा रहा है। इसके लिए एक ओर इंजीनियरिंग व मेडिकल कॉलेज जैसे संस्थानों में सप्लाई करने वालों का ब्योरा जुटाया जाएगा तो साथ ही बिजली विभाग से भी कॉमर्शियल कनेक्शनों के बिल भुगतान की जानकारी लेकर इसका मिलान टर्नओवर से किया जाएगा।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की फटकार के बाद वाणिज्य कर विभाग प्रदेश में ऐसे व्यापारियों की तलाश में जुट गया है, जिन्होंने 20 लाख रुपये से कम सालाना टर्नओवर दिखाते हुए जीएसटी में पंजीकरण नहीं कराया है, जबकि उनका वास्तविक कारोबार इससे कहीं अधिक है। वाणिज्य कर विभाग के एडीशनल कमिश्नर विवेक कुमार बताते हैैं कि 20 लाख रुपये से कम टर्नओवर का मतलब डेढ़-पौने दो लाख रुपये महीने की बिक्री हुई। इसमें अधिकतम 10 फीसद मार्जिन निकाला जाए तो भी 15 हजार रुपये महीने की आमदनी हुई।

ऐसे में यदि कोई कारोबारी प्रतिमाह औसतन आठ हजार रुपये का बिजली बिल जमा कर रहा है तो उसकी आय को सच नहीं माना जा सकता। इसी तरह विभिन्न संस्थानों में कर्मचारियों के तौर पर मैन पावर सप्लाई करने वाले, सिक्योरिटी सर्विस उपलब्ध कराने वाले या वस्तुओं की सप्लाई करने वालों को लगातार अच्छा भुगतान मिल रहा है, तो उनके 20 लाख रुपये से कम के सालाना टर्नओवर की पोल खुलने में भी देर नहीं लगेगी।

सर्विस सेक्टर पर खास नजर
वस्तुओं के कारोबारियों का टर्नओवर तो वाणिज्य कर विभाग फिर भी बिल व अन्य प्रपत्र देखकर पता लगा लेता है, लेकिन सर्विस सेक्टर के व्यापारियों का टर्नओवर पता लगाना विभाग के लिए आसान नहीं है। इसीलिए सूचनाओं के आधार पर टर्नओवर के अनुमान की तरकीब का प्रयोग खास तौर पर कोचिंग सेंटर, सिक्योरिटी एजेंसी व ऐसे अन्य व्यवसाय पर होगा। जीएसटी के दायरे से बाहर रह गए कारोबारियों में इस वर्ग की संख्या अधिक बताई जा रही है।

एक साल में बढ़े केवल साढ़े छह लाख व्यापारी
एक साल पहले जीएसटी शुरू होने के समय प्रदेश में पंजीकृत व्यापारियों की संख्या करीब सात लाख थी। इन व्यापारियों को जीएसटी में माइग्रेट कराने के अलावा वाणिज्य कर विभाग एक साल में साढ़े छह लाख नए व्यापारियों को ही जीएसटी में शामिल करा पाया है। अब तक हुए 13.50 लाख पंजीकरण को कम बताते हुए मुख्यमंत्री ने 20 लाख का लक्ष्य दिया है।

इस लक्ष्य तक पहुंचने के लिए अधिकारियों को और साढ़े छह लाख व्यापारियों का पंजीकरण कराना होगा, लेकिन अब इसके लिए एक साल का समय नहीं मिलेगा। यह लक्ष्य कुछ महीनों में ही हासिल करने की योजना बनाई जा रही है, ताकि फिर 50 लाख पंजीकरण के अगले लक्ष्य के लिए कदम बढ़ाए जा सकें।