ई-वे बिल जो मार्च के पहले हफ्ते में लागू किया जा सकता है

ई-वे बिल जो मार्च के पहले हफ्ते में लागू किया जा सकता है

जीएसटी में ई-वे बिल की शुरुआत टैक्स चोरी रोकने के लिए की गई है. अक्टूबर में टैक्स वसूली में गिरावट को लेकर टैक्स चोरी को सरकार ने एक बड़ी वजह बताया है.

तकनीकी खामियों के कारण 1 फरवरी से लागू होने वाला ई-वे बिल मार्च के पहले हफ्ते से लागू किया जा सकता है. वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) परिषद ने वस्तुओं को एक राज्य से दूसरे राज्य ले जाने के लिए ई-वे बिल व्यवस्था को सात मार्च से लागू करने की तैयारी में है. 10 किलोमीटर से ज्यादा दूरी पर माल लाने और ले जाने पर ई-वे बिल जरूरी होगा. यह बिल ऑनलाइन निकलेगा. ई-वे बिल की खासियत यह है कि इसकी दूरी सड़क, रेल मार्ग की बदले गूगल मैप से निकाली जाएगी. यानी कितनी दूर माल भेजा इसकी जानकारी ऑनलाइन गूगल मैप से ही पता चल जाएगा. ऐसे में गड़बड़ी की आशंका कम रहेगी.

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इनफारमेटिक्स सेंटर (एनआईसी) ने सरकार से ई-वे बिल सिस्टम को एक अप्रैल से लागू करने का अनुरोध किया था लेकिन सरकार ने इसे पहले लागू करने का मन बनाया है, ताकि व्यावहारिक दिक्कतों को भी समय रहते दूर किया जा सके और एक अप्रैल से चुस्त-दुरुस्त व्यवस्था रखी जा सके. राज्यों के भीतर ई-वे बिल की अनिवार्यता के लिए राज्य सरकारों को जून तक का समय दिया गया है. केंद्र सरकार की कोशिश है कि ई-वे बिल पोर्टल रोजाना लाखों बिल उत्पन्न करने की क्षमता पर खरा उतरे.

ई-वे बिल इलेक्ट्रानिक तरीके से निकाले जा सकेंगे. ई-वे बिल निकालने के लिए आधिकारिक पोर्टल पर जीएसटीआईएन देकर अपना पंजीकरण करा सकेंगे. ऐसे ट्रांसपोर्टर जो जीएसटी में पंजीकृत नहीं हैं अपना पैन या आधार नंबर देकर खुद को ई-वे बिल प्रणाली में शामिल कर सकेंगे और ई-वे बिल निकाल सकेंगे. ई-वे बिल को उसे निकालने के 24 घंटे के भीतर रद्द करने का भी प्रावधान है.

जीएसटी में ई-वे बिल की शुरुआत टैक्स चोरी रोकने के लिए की गई है. अक्टूबर में टैक्स वसूली में गिरावट को लेकर टैक्स चोरी को सरकार ने एक बड़ी वजह बताया है.